सामने आ रहे घोटाले राजनीतिक भ्रष्टाचार का असली काला चेहराः चमोली

टाइमिंग पर सवाल वाले बताएं, पहले इस्तीफा क्यों नहीं और कौन हैं बाकी दोषी

देहरादून । भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और धर्मपर क्षेत्र के विधायक विनोद चमोली ने कहा कि प्रदेश और देश में सामने आ रहे कांग्रेसी घोटाले कांग्रेस के राजनैतिक भ्रष्टाचार का असली चेहरा है। पूर्व सीएम हरदा के पीए के पास काले धन की बरामदगी और आरोपी पीए के कांग्रेसी चंदा मॉडल वाला बयान से साबित होता है, वहां करप्शन पार्टी की पूरी दाल ही काली है। पार्टी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए  चमोली ने आज भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने वाली कांग्रेस की पोल खोल दी। उन्होंने कांग्रेस सरकारो के ऐसे ही एक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा, अभी कर्नाटक के अंदर पाया गया कि कांग्रेस के एक मंत्री सतीश के, जो पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर हैं। उनके परिवार के पास अथाह संपत्ति ईडी ने जब्त की है और जब उसकी तह में जाया गया तो पता चला कि अफ्रीका तक उनका व्यापार फैला हुआ है। अफ्रीका में इसी भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खदान का उद्योग चल रहा है, जो उनके परिजनों के नाम से चल रहा है, उनकी कंपनियां उसमें चल रही हैं।
घ्उन्होंने कहा, ऐसा एक घटनाक्रम हमारे उत्तराखंड में भी हुआ है। चंदन सिंह जीना, जो कि पूर्व मुख्यमंत्री माननीय श्री हरीश रावत जी के पीएस थे, उनके बहुत करीबी रहे हैं और आज तक उनके करीबी हैं, उनके यहां भी ईडी के छापे पड़े। छापों में जिस तरह से वहां पर चीजें मिली हैं गोल्ड मिला है, कैश मिला है, यहां तक कि विदेशी मुद्रा भी उनके यहां मिली है। और साथ में बहुत कीमती चीजें, जो कि हम लोग सोच भी नहीं पाते हैं, इतनी महंगी चीजें उनके पास मिली हैं। उन्होंने हैरानी जताई कि अब इतना बड़ा करप्शन उत्तराखंड में होता रहा और कांग्रेस मूकदर्शक बनकर देखती रही। और ऐसे में आज जब उसका पर्दाफाश हुआ है, ईडी ने वहां छापे मारे हैं और ये सब चीजें निकली हैं, तो हरीश रावत कहते हैं कि मैं इस्तीफा देता हूं।
घ्जबकि ये तो उनके समय की जांच है, नई बात नहीं है। आज तो ईडी ने छापा मारा है, तो वहां चीजें निकली हैं। लेकिन यह विषय उसी समय स्पष्ट हो गया था कि नियुक्तियों में भ्रष्टाचार हुआ है, परीक्षाओं में भ्रष्टाचार हुआ है। स्वयं उनके द्वारा जांच बिठाई गई, पहले लीपापोती की गई, फिर दोबारा जांच बैठी, जांच में दोषी पाए गए।
उन्होंने हरदा के इस्तीफे पर सवाल उठाए कि इस पूरे घटनाक्रम में वे मुख्यमंत्री थे, लेकिन उन्होंने तब इस्तीफे की पेशकश नहीं की। उसके बाद से आज लगभग 9 साल हो गए हैं। उनको मालूम था कि भ्रष्टाचार हुआ है, लेकिन कभी बाद में भी इस्तीफे की पेशकश नहीं की। अंन्ततः जब पकड़े जाते हैं, तो फिर फजीहत से बचने के लिए इस्तीफे की पेशकश करते हैं, सहानुभूति लेने का प्रयास करते हैं। कांग्रेस को यह बताने का प्रयास करते हैं कि मैं तो कांग्रेस का बड़ा सच्चा सिपाही हूं, मेरे कारण कांग्रेस पर कोई चुनाव में उस पर दुष्प्रभाव न पड़े, तो मैं इस्तीफा देता हूं इस तरह की बातें करते हैं। लेकिन उन्हें जवाब देना चाहिए कि उनकी नैतिक जिम्मेदारी क्या थी? जब उनके मुख्यमंत्री रहते हुए यह घोटाला सामने आ गया था, तो वहीं पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। नहीं तो कम से कम अपने पद से उसी समय इस्तीफा तो दे सकते थे।
इसी तरह उन्होंने कटाक्ष किया कि चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले में म्क् की कार्रवाई के बाद मीडिया में लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। उसमें बरामदगी और पार्टी फंड के लिए रकम जुटाने के दावों ने कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आज मीडिया में चंदन सिंह जीना का बयान सामने आया है कि म्क् द्वारा बरामद रकम अलग-अलग लोगों की ओर से कांग्रेस के पार्टी फंड के लिए दिया गया चंदा था। अब कांग्रेस को बताना चाहिए कि यह कौन-सा ष्चंदा मॉडलष् है, जिसमें पार्टी फंड के नाम पर व्ैक् के जरिए रकम जुटाई जाती है? राहुल गांधी और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल स्पष्ट करें कि किसने कितना चंदा दिया? क्या यह कांग्रेस के पार्टी फंड के लिए जुटाया जा रहा था या क्या पार्टी फंड के नाम पर गांधी परिवार की राजनीतिक जरूरतों के लिए कोई फंडिंग सिस्टम चल रहा था? लिहाजा कांग्रेस को आरोपों से बचने के बजाय इस कथित चंदा व्यवस्था का पूरा हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि कुल मिलाकर, चाहे उत्तराखंड हो, चाहे कर्नाटक हो, भ्रष्टाचार का एक ही पैटर्न है। यहां यूकेएसएससी में भ्रष्टाचार हो रहा है, वहां पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट में रिश्वतखोरी हो रही है और कांग्रेस के कार्यकर्ता फल-फूल रहे हैं, यह इनका असली चरित्र है। और आज भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर उत्तराखंड में तमाम बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। इस नकल को मुद्दा बनाकर, यहां पर छात्रों को गुमराह करने का काम होता है। छम्म्ज् में पेपर लीक हुआ, हमने भी माना। लेकिन उसके बाद हमने छम्म्ज् की परीक्षाएं कराईं, ठीक प्रकार से। लगभग 12 लाख छात्र उसमें क्वालीफाई हुए, हमने वो भी उसी दौरान किया। और यहां तक कि हमने छात्रों का मान-सम्मान रखते हुए, उन नौजवानों का जो कि उसमें प्रदर्शन कर रहे थे, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा तक दिया । जहां तक उत्तराखंड का सवाल है, तो जब पेपर लीक के मामले हमारे सामने आए, तो हमने बहुत सख्ती उस पर की। लगभग 200 से अधिक लोगों को हमने जेलों में डाला, जो बहुत उच्च अधिकारी भी रहे। उसके बाद हमको लगा कि इस पर नकेल कसनी आवश्यक है, इसके लिए कोई कानून बनाना पड़ेगा, तो हम सख्त नकल-विरोधी कानून लेकर आए। पत्रकार वार्ता में प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चैहान, सह मीडिया प्रभारी राजेंद्र सिंह नेगी, संपर्क प्रमुख हरीश चमोली भी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।